pcod and pcos treatment

पीसीओडी/पीसीओएस क्या है (What is PCOD / PCOS)
PCOS और PCOD में क्या अंतर है
पीसीओएस के लक्षण (PCOS hone ke lakshan)
पीसीओएस के कारण (PCOS Ke Karan in Hindi)
पीसीओडी का आयुर्वेदिक इलाज (PCOS ko khatm karne ke upay in Hindi)
जानें पीसीओडी से पीड़ित महिलाएं क्या खाएं और क्या नही (PCOS hone me kya khana chahiye)
पीसीओडी के घरेलु उपाय (PCOD ke liye gharelu upay in Hindi)

 

पीसीओडी/पीसीओएस क्या है (What is PCOD / PCOS)

वर्तमान समय में प्रदूषण युक्त जीवनशैली और जंक फूड के अत्यादिक सेवन करने की वजह से PCOS जैसी गंभीर समस्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। PCOS से पीड़ित महिला निःसंतानता और अनियमित महावारी की समस्या का शिकार हो जाती है। पीसीओडी और पीसीओएस के उपचार के लिए आयुर्वेद चिकित्सा एक बेहतरीन विकल्प है।

पीसीओडी की बीमारी का मुख्य कारण हार्मोन की गड़बड़ी को माना जाता है। महिलाओं के शरीर में जब पुरुष हार्मोन (male hormone) की अधिकता बढ़ जाती है तो पीसीओडी की समस्या उत्पन्न होती है। यह बीमारी वयस्क महिलाओं के साथ-साथ छोटी उम्र की लड़कियों को भी हो जाती है जो पीसीओडी या पीसीओएस का नाम तक भी नहीं जानती है।

दुनियाभर में प्रत्येक 10 में से 4 महिला PCOD से पीड़ित है। आयुर्वेद के अनुसार यह एक सामान्य अंतःस्रावी विकार (endocrine disorders) है जो आमतौर पर महिलाओं की प्रजनन क्षमता को बहुत ही ज्यादा प्रभावित करता है।

 

PCOS और PCOD में क्या अंतर है – 

हम में से बहुत से लोग पीसीओडी और पीसीओएस को एक ही समझने की भूल कर बैठते हैं। परंतु आज हम यहाँ आपको इन दोनों में अंतर समझाने का प्रयास करेंगे।

SYNDROME शब्द का प्रयोग रोग के समूह के लिए प्रयोग होता है जो एक दूसरे से संबंधित नहीं होते हैं और आम तौर पर विशेष बीमारी से जुड़े हैं। SYNDROME किसी एक बीमारी के लिए प्रयोग नही किया जा सकता है। PCOS अर्थात पोलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम और PCOD पोलिसिस्टिक ओवेरियन डिज़ीज़ को दर्शाता है।

पीसीओएस उपापचय (metabolism) की क्रियाओं से संबंधित विकार है। पीसीओडी को पीसीओएस से अधिक गंभीर माना गया है। यह विकार मुख्यतः पुरुष हार्मोन की अधिकता के कारण होता है। जिसके कारण महिलाओं में हर माह एक से अधिक सिस्ट बनने लगते है। दुष्परिणाम परिणामस्वरूप निःसंतानता, मोटापा और बाल गिरने के लक्षणों के साथ डिम्ब का क्षरण होने लगता है। पीसीओडी की तुलना में यह अधिक गंभीर स्थिति का निर्माण करता है।

पीसीओडी एक ऐसी स्थिति है जिसमें कई अपरिपक्व या आंशिक रूप से परिपक्व अंडे बनने लगते हैं। जैसे- पेट निकलना, अनियमित पीरियड्स, पुरुष पैटर्न हेयर लॉस और इनफर्टिलिटी जैसी समस्या शामिल हैं।

 

पीसीओएस के लक्षण (pcos hone ke lakshan)

यदि आप PCOD की बीमारी से पीड़ित है तो आपको कुछ ऐसे  सामान्य संकेत दिखाई देंगे।

  1. मासिक धर्म (पीरियड्स) का बंद होना, अनियमित पीरियड्स या भारी मासिक धर्म का होना।
  2. श्रोणि क्षेत्र (Pelvic area) में दर्द होना ।
  3. चेहरे या शरीर के अन्य हिस्सों पर बालों की अधिक वृद्धि ।
  4. मुंहासे, दाग धब्बे एवं त्वचा संबंधी बीमारी होना। 
  5. मोटापा मुख्य रूप से पेट का अचानक वजन बढ़ना और वजन कम करने में समस्या होना।
  6. काले धब्बे और त्वचा का मोटा होना इत्यादि। 

उपरोक्त में से कोई यदि एक लक्षण संकेत के रूप में दिखाई देते है या फिर महसूस होते है तो किसी अच्छे स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरुर करें अन्यथा समस्या गंभीर हो सकती है। 

 

पीसीओएस के कारण (pcos Ke Karan in Hindi)

  1. हार्मोनल असंतुलन के कारण समस्या उत्पन्न होती हैं। पीसीओएस के साथ महिलाओं में एण्ड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है। आयुर्वेद में पीसीओएस का कारण अधिक मिठाइयों और कफ युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन हो सकता है। इस वजह से कफ की मात्रा बढ़ जाती है। कफ की मात्रा बढ़ने पर कप दोष बनता है। 
  2. Artava dhatu महिला के प्रजनन में सहायक होती है और Artavaha srotas एक शारीरिक वाहिका है जो की पोषण करने के साथ साथ डिंब को गर्भाशय तक ले जाने में सक्षम बनाती है।
  3. आयुर्वेद के अनुसार त्रिदोष (वात दोष, पित्त दोष, कफ दोष) के कारण महिलाओं के शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे पीसीओडी जैसी समस्या होती है। 
  4. जब महिलाओं के प्रजनन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है तो इसके कारण उनका मेटाबोलिज्म (पाचन क्रिया)  भी ठीक से काम नहीं करता है और जिसका प्रभाव उनके मासिक चक्र पर पड़ता है। इस समस्या के कारण भी पीसीओएस या पीसीओडी हो सकता है। 
  5. अनुवांशिक बीमारी भी पीसीओडी का कारण है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान द्वारा पीसीओडी के बारे में जारी किए आंकड़ो में साफ तौर पर कह दिया है कि यदि किसी महिला की बहन या माँ को पीसीओडी की बीमारी है तो उसे भी यह बीमारी हो सकती है। 

 

पीसीओडी का आयुर्वेदिक इलाज (pcos ko khatm karne ke upay in hindi)

आयुर्वेद एक संपूर्ण विज्ञान है जिसके अनुसार मन और शरीर में कोई भेद नही है। पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम के लिए आयुर्वेदिक उपचार सस्ता, प्रभावी और सभी प्रकार के दुष्प्रभाव से रहित है। पीसीओडी की समस्या से  छुटकारा पाने के लिए आयुर्वेदिक उपचार की दिशा में पहला कदम आशा आयुर्वेदा ने उठाया है। 

  1. PCOD के लक्षणों में अपान वायु, कफ दोष, अग्निमांद्य और मेदोवृद्धि प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार इसे देखते हुए आहार और नियमित व्यायाम का पालन किया जाना चाहिए।
  2. पीसीओएस के लिए आयुर्वेदिक दवा को सिंड्रोम के रोगजनन के अनुसार चुना जाता है।
  3. त्रिकटु चूर्ण, हरीतकी चूर्ण, हिंग्वाष्टक चूर्ण, चित्रकादि गुटिका आदि का उपयोग अग्निमांद्य और अन्य पाचन के लिए किया जाता है। इन जड़ी बूटियों से अपान- वात अनुलोमन की सुविधा होती है।
  4. मोटापा दूर करने लिए, मधु, यव, कुल्थी आदि के साथ आहार में संशोधन का जिक्र भी चरक संहिता के (अष्टदल) अध्याय में उल्लेखित है।
  5.  नियमित व्यायाम के साथ जीवन शैली में बदलाव मोटापे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  6. शतपुष्पा और शतावरी चूर्ण का उपयोग उन महिलाओं के लिए किया जाता है  जिनमे पीरियड्स तो नियमित होता है परंतु वह गर्भधारण करने में सक्षम नहीं है।
  7. सिस्ट (पुटी) के आकार को कम करने में कांचनार गुग्गुल और सुकुमार घृत लाभदायक है।
  8. वमन कर्म पंचकर्म प्रक्रिया का एक हिस्सा है जो शरीर के वाहिकाओं की रुकावट को हटाकर वात-कफ दोष को खत्म करता है। कफ दोष को कम करने से आर्तव चक्र (menstrual cycle) ठीक हो जाता  है।
  9. उत्तर बस्ती योनि या मूत्रमार्ग के माध्यम से प्रशासित एक औषधीय एनीमा है । आयुर्वेदिक औषधि के साथ उत्तर बस्ती आर्तवन श्रोत (मासिकधर्म)की रुकावट को दूर करती है।
  10.  मासिक धर्म के रुकने के बाद शतपुष्पा तेल की मातृ बस्ती के साथ पथ्यादि काढ़ा(Pathadi kwatha) बहुत लाभकारी है क्योंकि इसमें ऐम्पैचना, वातानुलोमन, अग्निदीपना, शतोषोधना और वात-कफशामना  के गुण होते हैं।
  11. पीसीओएस के उपचार के लिए अन्य हर्बल दवाएँ जैसे नारायण तेल, पुष्पधन्वा रस, रसोन कल्प, कुमार्यासव आदि का उपयोग किया जाता है।

गर्भवती होने के लिए पीसीओडी की सर्जरी कितने प्रतिशत कारगर है – 

लैप्रोस्कोपी एक ऑपरेशन है जिसे पेट या श्रोणि में एक कैमरे की सहायता से चीरों का उपयोग करके किया जाता है। इस प्रक्रिया में एक चीरे के माध्यम से डिम्बग्रंथि में ड्रिलिंग की जाती है। जिसका उपयोग महिलाओं में ओवुलेशन के लिए किया जाता है। यह सर्जरी उन महिलाओं में की जाती है जो  प्रजनन क्षमता कम होने के बाद भी डिंबोत्सर्जन (Ovulation) नहीं कर पाती हैं।

सर्जरी से जुड़े कुछ जोखिम हैं जैसे कि –

  1. अत्यधिक दर्द के साथ रक्तस्राव
  2. पैल्विक अंगों पर स्कार टिश्यू
  3. एनेस्थीसिया संबंधित जोखिम (खतरा)
  4. महिला अंडाशय के क्षतिग्रस्त (खराब) होने की संभावना
  5. इतने जोखिम के बाद भी पीसीओएस की सर्जरी के माध्यम से गर्भधारण की सफलता दर लगभग 30% से भी कम हो जाती  है और दुष्प्रभाव बहुत ज्यादा होते है। 

 

जानें पीसीओडी से पीड़ित महिलाएं क्या खाएं और क्या नही (pcos hone me kya khana chahiye) – 

  1. पीसीओएस का इलाज और गर्भधारण हेतु जीवनशैली में बदलाव और पोषक पदार्थों को आहार में शामिल करना  सबसे अच्छा प्राकृतिक तरीका है। 
  2. पीसीओएस का उपचार उच्च कोटि के आहार का सेवन और कुछ खाद्य पदार्थों के परहेज करने से हार्मोन और मासिक धर्म को नियमित करके किया जा सकता है।
  3. फल, सब्जियां, फलियां और साबुत अनाज पीसीओएस आहार चार्ट का हिस्सा हैं। 
  4. रासायनिक आधारित भोजन और परिरक्षकों(Preserved food) से बचना अंतःस्रावी तंत्र के कार्य को बढ़ाता है। जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  5. स्वस्थ प्रोटीन –  नट, फलियां और साबुत अनाज जैसे प्रोटीन आधारित स्रोतों का भरपूर सेवन करें।
  6. टमाटर, पत्तेदार हरी सब्जियां, मैकेरल, टूना जैसे एंटी इंफ्लेमेटरी फूड्स पीसीओएस के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।
  7. आयरन (लौह तत्व) और मैग्नीशियम का सेवन करें- जो महिलाएं पीसीओएस में भारी रक्तस्राव का सामना करती हैं, वे आयरन की कमी से पीड़ित हो सकती हैं, इसलिए अपने आहार में आयरन से भरपूर भोजन जैसे ब्रोकोली, पालक आदि को शामिल करने की सलाह दी जाती है।
  8. केले, काजू, बादाम मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं इनका भी सेवन जरुर करें।
  9. कैफीन युक्त पदार्थों से परहेज करें- कैफीन की खपत एस्ट्रोजन के स्तर को प्रभावित करती है जिससे हार्मोनल परिवर्तन होने लगता है।
  10. शरीर के वजन को नियंत्रित करें –  वजन कम करना उपचार की पहली और सबसे अग्रणी पहल है। जो की इंसुलिन के प्रतिरोध को कम करने में मदद करती है। साथ ही पीरियड्स को नियंत्रित कर पीसीओएस से संबंधित जोखिम को कम करने का कार्य करती है।
  11. प्राकृतिक रूप से गर्भवती होने के लिए महिलाओं को खानपान और अपनी जीवनशैली में परिवर्तन जरुर करना होगा जो किसी उपचार से कम नही है। 
  12. आयुर्वेद में प्राचीन लाभकारी औषधि एवं काढ़े आज भी उपलब्ध है जो की पीसीओडी की सबसे कारगर दवाओं (best medicine for pcos in ayurveda) में से एक है। 

 

पीसीओडी के घरेलु उपाय (pcod ke liye gharelu upay in hindi)  – 

यदि आपको जांच एवं परीक्षण के आधार पर कंफर्म हो गया है कि आपको पीसीओडी की समस्या है तो घरेलू उपाय एवं उपचारों से भी इसको ठीक कर सकती है। 

  1. सर्वप्रथम में वजन नियंत्रित करें, जो कि पीसीओडी के जोखिम को कम करता है।
  2. कार्बोहाइड्रेट का कम से कम सेवन करें। 
  3. पीसीओडी में दालचीनी का  (pcos me dalchini ke fayde) प्रयोग जरुर करें क्योंकि यह सबसे अच्छा और सस्ता घरेलू उपाय है। 
  4. पीसीओडी में कुछ परहेज (pcos me parhej) जरुर करें जैसे की अपने खानपान में जंक फूड को बिल्कुल भी न शामिल करें। अधिक गर्म तथा अधिक ठंडे पदार्थों का सेवन न करें। 
  5. व्यायाम एवं योग (pcos ke liye yoga) ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करने में मदद करता है इसलिए नियमित तौर पर योग जरुर करें। 

 

मर्म थेरेपी- मर्म चिकित्सा पीसीओएस के वैकल्पिक उपचार में से एक है। यह अंडाशय में रक्त के प्रवाह में सुधार करती है, कोर्टिसोल के स्तर को कम करती है, इंसुलिन प्रतिरोध में सुधार करती है और वजन घटाने में फायदेमंद है।

परंतु यह ध्यान रहे pcod के उपचार के किसी भी तरीके का चयन करने से पहले पीसीओएस के लिए सबसे अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। हम में से अधिकतर लोग आयुर्वेदिक पीसीओएस उपचार की तलाश में बस सर्च इंजन में दिखाए गए  क्लीनिकों में प्रवेश कर जाते है। पीसीओडी के सफल उपचार हेतु एवं मरीजों की संतुष्टि के आधार पर आशा आयुर्वेदा को दिल्ली में पीसीओडी उपचार (best medicine for pcos in ayurveda) के लिए सर्वश्रेष्ठ केंद्र माना गया है। जो लोग पीसीओएस / पीसीओडी उपचार की तलाश कर रहे हैं वे देरी न करते हुए आयुर्वेदिक स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें। पीसीओएस के लिए आयुर्वेदिक उपचार सस्ती, प्रभावी और शत प्रतिशत प्राकृतिक चिकित्सा है।

 

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Frequently Asked Questions

If you have PCOS it’s time to pay immediate attention to the food that you must avoid. One must avoid red meat, processed food, junk food,dairy products and gluten foods.

PCOS is a hormonal condition that affects 18% of women. Exercise is extremely helpful in managing the symptoms of PCOS. You can adopt certain yoga pose, walking, swimming, jogging and cycling are the best for exercise for PCOS.