लो एएमएच क्या होता है? - LOW AMH IN HINDI

लो एएमएच क्या होता है? LOW AMH IN HINDI

लो एएमएच क्या होता है? – एंटी-मुलरियन हार्मोन (AMH) एक प्रकार का हार्मोन होता है जो अंडाशय के अंदर मौजूद फॉलिक्लस के ग्रनुलोसा सेल के द्वारा बनाया जाता है। महिलाओं में ओवेरियन रिजर्व (Ovarian Reserve) की स्थिति पता करने के लिए एंटी-मुलरियन हार्मोन (एएमएच) स्तर एक विश्वसनीय बैरोमीटर है। निम्न एएमएच स्तर बताता है कि महिलाओं के ओवेरियन रिजर्व में तेजी से गिरावट आ रही है और अगर वे गर्भवती होने की कोशिश कर रही हैं तो उन्हें तुरंत प्रजनन उपचार की तलाश करनी चाहिए। इसलिए, एएमएच स्तर के माध्यम से अंडों की गुणवत्ता और मात्रा निर्धारित की जा सकती है।

सबसे पहले जानेगे की AMH क्या होता है, और AMH लेवल कितना होना चाहिए जिसके कारण महिला का गर्भधारण निर्भर होता है। AMH Test को समझने के लिए हमें जानना होगा की जन्म से पहले ही महिलाओं के अंडे की संख्या तय होती है जो महावारी के शुरु होते ही हर महीने खत्म होते जाते है।

21 से 30 साल की उम्र में अंडे की क्वालिटी बहुत अच्छी होती है और यही गर्भधारण करने का सही समय होता है। लेकिन समय के साथ हमारी बदलती जीवनशैली से महिला के अंडे की क्वालिटी गिरने लगती है। डॉक्टर ओवरी में एग काउंट का पता लगाने के लिए AMH Test करवाते है। इसमें ब्‍लड टेस्‍ट के जरिए इसके लेवल का पता चलता है। और यही टेस्ट बताता है कि आपके ओवेरियन रिजर्व के बारे में बताते है कि एक महिला में कितनी उम्र तक गर्भधारण करने की क्षमता हो सकती है। सामान्य महिला में AMH level (AMH level kitna hota hai) का 2.5 से 6.0 नैनोग्राम/मिली होता है। इससे कम या ज्यादा आने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। 

ये भी पढ़िए : कम एएमएच (Low AMH) में कैसे करें गर्भधारण ?

लो एएमएच के कारण – LOW AMH KE CAUSES

Low AMH के कारण एक महिला को गर्भाधारण नहीं हो सकता है। इन निम्नलिखित में लो एएमएच क्या होता है? लो एएमएच के कारण शामिल हैं-

  • एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis): यह प्रजनन प्रणाली का एक दर्दनाक विकार है। ऐसी स्थिति जिसमें आमतौर पर आपके गर्भाशय के अंदर पाए जाने वाले ऊतक गर्भाशय के बाहर बढ़ते है। इस मामले में, सूजन और निशान ऊतक अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुंचाते हैं, जिसके वजह से एएमएच का स्तर कम हो जाता है।
  • जेनेटिक कारक (Genetic Factor): जीन में परिवर्तन यानी परिवार वालों में कम एएमएच का इतिहास हो सकता है जो आपके एएमएच के स्तर को भी प्रभावित कर सकता है।
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome): पीसीओएस (PCOD) सबसे आम महिला प्रजनन विकार है। इसमें आपके अंडाशय ने असामान्य मात्रा में पुरुष सेक्स हार्मोन एण्ड्रोजन का उत्पादन होता है। अंडाशय में बनने वाले छोटे सिस्ट की संख्या आपके एएमएच स्तरों को प्रभावित कर सकती है।
  • ऑटोइम्यून रोग (AutoImmune Disease): इस बीमारी में प्रतिरक्षा प्रणाली आपकी स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करती है और इस प्रकार स्वस्थ अंडे की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। इस कारण भी आपके एएमएच स्तर में कमी आती है।
  • जीवनशैली में बदलाव (Change in Lifestyle): कुछ जीवनशैली कारक आपके शरीर में एएमएच के स्तर को भी प्रभावित कर सकते हैं, जैसे अत्यधिक धूम्रपान करना, ज्यादा तनाव लेना, पर्यावरण प्रदूषण, मोटापा बढ़ना, और विटामिन डी की कमी से भी एएमएच का लेवल कम होता है।

लो एएमएच का लक्षण – LOW AMH KE SYMPTOMS

AMH हमारे बचे हुए अंडे की मात्रा और गुणवत्ता के बारे में बताते है। वैसे तो लो एएमएच के कोई सटीक लक्षण नहीं है लेकिन फिर भी कुछ हद तक लो एएमएच के लक्षण के बारे में समझ सकते है:

  • पहला मासिक धर्म के दौरान कम रक्त प्रवाह
  • दूसरा मासिक चक्र की अवधि में लगातार कमी
  • तीसरा की मासिक धर्म आना ही बंद हो जाते है 
  • हार्ट फ्लैशेस यानी मेनोपोज के लक्षण 

लो एएमएच से प्रेगनेंसी – LOW AMH PREGNANCY

LOW AMH (लो एएमएच क्या होता है) वास्तव में बांझपन का कारण नहीं है बल्कि ओवेरियन रिजर्व की स्थिति का संकेत है। ओवेरियन के भंडार में कमी से गर्भावस्था और बांझपन से संबंधित समस्याएं होती हैं। अगर अंडों की संख्या या ओवेरियन रिजर्व में अंडे नहीं हैं, तो गर्भवती होने की संभावना कम हो जाती है। इसलिए कम एएमएच स्तर वाली महिलाओं को बिना देर किए इलाज कराना चाहिए।

कम उम्र की महिलाओं में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब AMH level कम होने के बावजूद महिलाओं को गर्भवती होने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। क्योंकि गर्भधारण हो भी जाता है तो गर्भपात की संभावना ज्यादा रहती है। 

ऐसे में अगर आप एएमएच टेस्ट करवा लेते है तो आपको कम या लो एएमएच लेवल का पता लग सकता है। तब आप बिना समय गवाएं अपना इलाज करवा सकती है। 

लो एएमएच का आयुर्वेदिक उपचार – LOW AMH KA AYURVEDIC TREAMENT

लो एएमएच इस बात का संकेत देता है कि ओवेरियन रिजर्व कम होते जा रहे है। लो एएमएच का आयुर्वेदिक उपचार से महिलाओं के अंडों की संख्या बढ़ाई जा सकती है और उनकी गुणवत्ता में भी सुधार किया जा सकता है। आयुर्वेद की प्रचीन पंचकर्मा पद्धति में उत्तर बस्ती सबसे बेहतरीन चिकित्सा है। उत्तर बस्ती एक ऐसी तकनीक है जिसमें मासिक चक्र के 6, 7, 8वें दिन गर्भाशय में औषधीय तेल डाला जाता है और 3 दिन के अंतराल के बाद जरुरत के अनुसार दोहराया जा सकता है। इस पद्धति से आपकी ओवरी में अंडे की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं।

लो एएमएच को लेकर आयुर्वेद का कहना है कि तनाव से भी अंडे की कमी होती है, इसलिए महिलाओं को तनाव नहीं लेना चाहिए। तनाव हार्मोन के स्राव को कम करता है, जिससे हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए दिनचर्या में तनाव को बिल्कुल भी न लें।

साथ ही आयुर्वेद की मदद से अंडों की गुणवत्ता और संख्या बढ़ाने के लिए आपको Fertility Diet लेनी चाहिए ताकि आपके अंडे खराब न हों और अच्छी गुणवत्ता के लिए तैयार हो। खानपान के अलावा लो एएमएच के लिए योग जरुर करे जो फर्टिलिटी रेट को बूस्ट करने में मदद करता है। 

सुर्य नमस्कार, भुजंगासन, अनुलोम-विलोम, तितली आसन, कपालभाती, नौकासन, भ्रमारी प्राणायाम और 30 मिनट तक पैदल चले। अगर आप ऐसी समस्या से जुझ रहे है तो कृपया उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें, क्योंकि ऐसा करना आपके जीवन के लिए खतरनाक होता है। 

इस लेख की जानकारी हमें डॉक्टर चंचल शर्मा द्वारा दी गई है। LOW AMH से जुड़ी या अन्य पीसीओएस, ट्यूब ब्लॉकेज, एंडोमेट्रिओसिस, हाइड्रोसालपिनक्स उपचार पर ज्यादा जानकारी चाहते हैं। हमारे Doctor Chanchal Sharma की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाए या हमसे 9811773770 संपर्क करें।


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